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गजानन माधव मुक्तिबोध द्वारा 'चाँद का मुँह टेढ़ा है' कविताओं का एक संग्रह है, जो 1964 में भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा प्रकाशित किया गया था। यह काव्य संग्रह अपनी प्रगतिशील और प्रयोगधर्मी कविताओं के लिए जाना जाता है, जिसमें 'अंधेरे में' जैसी लंबी कविताएँ शामिल हैं, जो स्वतंत्रता-पूर्व और पश्चात की सामाजिक-राजनीतिक स्थितियों को दर्शाती हैं।

चाँद का मुँह टेढा है

SKU: 978-93-49983-83-0
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