“भारतीय ज्ञान मीमांसा: वेद से विज्ञान तक” डॉ. राजेश कुमार पांडेय की एक महत्वपूर्ण और विचारशील पुस्तक है, जो प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणाली और आधुनिक विज्ञान के बीच के गहरे सम्बन्धों का विश्लेषण
प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक न केवल शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामान्य पाठकों और शोधकर्ताओं के लिए भी ज्ञानवर्धक है। पुस्तक में लेखक ने भारतीय ज्ञान परंपरा की विविध धाराओं—जैसे वेद, उपनिषद, संस्कृत साहित्य, दर्शन, तर्कशास्त्र और मीमांसा—का विस्तृत विवेचन किया है। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि कैसे प्राचीन भारतीय विचारधारा, ज्ञान और तर्क आज के वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ सामंजस्य स्थापित कर सकती है। इस पुस्तक की विशेषता यह है कि इसमें सिर्फ प्राचीन ज्ञान का ऐतिहासिक या धार्मिक विश्लेषण नहीं किया गया है, बल्कि आधुनिक विज्ञान, तर्कशास्त्र और दर्शन के संदर्भ में उसकी प्रासंगिकता पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। लेखक ने उदाहरणों, सैद्धांतिक विश्लेषणों और तार्किक व्याख्याओं के माध्यम से यह दिखाया है कि भारतीय ज्ञान की
परंपरा कितनी व्यापक, गहन और समय-निर्मित है। पुस्तक को अध्यायों में व्यवस्थित किया गया है, जिसमें पहले प्राचीन वेदों और उपनिषदों की मीमांसा की गई है, फिर भारतीय तर्कशास्त्र, दर्शन और
तात्त्विक ज्ञान की व्याख्या की गई है। अंत में, आधुनिक विज्ञान और तकनीकी ज्ञान के साथ प्राचीन भारतीय ज्ञान के सम्बन्धों और उसकी उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की गई है। यह पुस्तक विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और ज्ञान प्रेमियों के लिए अत्यंत उपयोगी है। यह न केवल भारतीय ज्ञान की गहराई को उजागर करती है, बल्कि इसे आधुनिक जीवन, शिक्षा और विज्ञान के संदर्भ में भी प्रस्तुत करती है। पाठक इस पुस्तक के माध्यम से भारतीय ज्ञान की तर्कसंगतता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और दार्शनिक गहराई को समझ सकते हैं। डॉ. पांडेय की यह पुस्तक भारतीय ज्ञान और विज्ञान के बीच पुल का काम करती है, जिससे पाठक न केवल ऐतिहासिक और दार्शनिक दृष्टिकोण से ज्ञान प्राप्त करते हैं, बल्कि इसे आधुनिक समय के प्रयोग और जीवन में लागू करने का मार्ग भी सीखते हैं ।
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SKU: 978-93-47162-75-6
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