जयशंकर प्रसाद (1889–1937) हिंदी साहित्य में छायावाद के प्रमुख स्तंभ और एक युगप्रवर्तक कवि हैं । उनका काव्य सौंदर्य, प्रेम, राष्ट्रप्रेम, दर्शन और रहस्यानुभूति का संगम है। प्रमुख कृतियों में 'कामायनी' (महाकाव्य), 'आँसू', 'लहर', 'झरना', 'प्रेम पथिक' और 'कानन-कुसुम' शामिल हैं, जो उनकी दार्शनिक और गीति शैली को दर्शाते हैं ।
सम्पूर्ण काव्य
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