डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने अपनी पुस्तक 'पाकिस्तान या भारत का विभाजन' (1945) में विभाजन का तार्किक विश्लेषण किया। उन्होंने हिंदू-मुस्लिम सांस्कृतिक मतभेदों के कारण इसे अनिवार्य माना और देश में शांति के लिए जनसंख्या के पूर्ण विनिमय (हिंदुओं का भारत और मुसलमानों का पाकिस्तान जाना) का सुझाव दिया, ताकि भविष्य में सांप्रदायिक तनाव न हो।
भारत का विभाजन
131

















