यह मेरे लिए अत्यन्त ही हर्ष एवं गौरव की बात
है कि मैंने अपने जीवन-पथ के अस्सी वर्ष पूर्ण कर लिए
है। जीवन के अस्सी बसन्त देख चुके तथा जीवन के
विभिन्न काल खंडों में प्राप्त अनुभवों, चिन्तन-मनन एवं
सीख से जो कुछ भी मैंने हासिल किया है उसे अपने
मनोगत के रूप में अभिव्यक्त करना अपना परम धर्म
समझता हूँ।
बन्धुओं आज पूरे विश्व में विकास से तात्पर्य
समग्र खुशी से (Gross Happiness) लिया जा रहा
है। समग्र खुशी के लिए ही सारे विकास के आयाम
संचालित हो रहे है। आज हर कोई खुश रहना चाहता
है, लेकिन बहुत कम लोग ही खुश रहना जानते हैं।
अधिकांश लोग छोटी-छोटी बातों में खुद को खपा
डालते हैं। जीवन में यदि खुश रहना है तो अतीत के
झटकों पर अटके न रहें। दूसरों की सफलता से जले
नहीं और साथ ही बनाए सम्बन्धों का एक मजबूत
नेटवर्क। जीवन में दूसरों को सम्मान देने एवं मदद
करने की आदत डाले।
संघर्ष से शिखर तक (जीवन के अस्सी वर्ष)
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