"आनंदमठ'' बंगाल के सुप्रसिद्ध लेखक बंकिमचंद्र चटर्जी का ऐतिहासिक और देशभक्ति से ओतप्रोत उपन्यास है, जो पहली बार वर्ष 1882 में प्रकाशित हुआ। यह उपन्यास 18वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में घटित संतान बिद्रोह (Sannyasi Rebellion) की पृष्ठभूमि पर आधारित है। कहानी बंगाल के उन साधु-संत्रों के संघर्ष को चित्रित करती है जो विदेशी शासन और अन्याय के विरुद्ध राष्ट्र के उत्थान के लिए संघर्षरत हैं। इस उपन्यास की सबसे अमर देन है "वन्दे मातरम्" गीत, जो बाद में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का जयघोष बन गया। उपन्यास में धर्म, राष्ट्र, बलिदान और मातृभूमि के प्रति प्रेम का अद्भुत संगम है। कथानक में महेंद्र कल्याणी, और भारती जैसे पात्रों के माध्यम से स्त्री-पुरुष समान रूप से देशप्रेम की भावना को जीते हैं। यह रचना भारतीय चेतना का प्रतीक है, जिसने पूरे राष्ट्र को आत्मगौरव और स्वतंत्रता के लिए प्रेरित किया ।
बंकिमचंद्र बटर्जी (1838-1894) आधुनिक भारतीय साहित्य के प्रथम महत्त्वपूर्ण उपन्यासकार माने जाते हैं। वे बंगाल के एक उच्च शिक्षित परिवार में कर्म और भारत के प्रथम आई. सी.एस. (Indian Civil Service) अधिकारियों में से एक थे। उनकी रचनाएँ केवल साहित्यिक नहीं बल्कि राष्ट्रवादी चेतना की आधारशिला थीं।
उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं- दुर्गेशनदिनी, कपालकुंडला, विषवृक्ष देवी चौधुराणी और आनंदमठ।
उनके लेखन में भारतीय संस्कृति, धर्म और राष्ट्रप्रेम का अद्भुत संगम मिलता है। "वन्दे मातरम्'' उनका अमर गीत है, जिसने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। बंकिमचंद्र ने साहित्य को केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जागरण का माध्यम बनाया ।
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