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मैं हिमांशु दूबे उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ का रहने वाला हूँ।
मेरी शुरूआती पढ़ाई कक्षा 6 तक सरस्वती शिशु मंदिर आज़मगढ़ में हुई, उसके बाद लखनऊ में पढ़ा। वर्ष 2023-26 में मैंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया नई दिल्ली से मास मीडिया में ऑनर्स की डिग्री ली और अभी 2026 से मैं भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), जम्मू में हिंदी पत्रकारिता का विद्यार्थी हूँ।
पान और पलाश' मेरे मन का एक विचार है। यह वास्तविक है और मेरी स्वयं की उपज है।
बचपन में माँ अक्सर कहती थीं - "पान, पान होता है और पलाश, पलाश होता है। ‘उसी एक शब्द को धारण करके मैंने इसका मानवीय तुलनात्मक अध्ययन किया है। 20 से 25 की उम्र में जब हम विश्वविद्यालय में होते हैं, दोस्तों के साथ रहकर चीजों को समझते हैं, दूसरों को जीतते-जीतते खुद को भूल जाते हैं यह किताब उसी उम्र की कहानी है।यह किताब आपको मेरे बारे में नहीं, अपने बारे में पढ़नी चाहिए। जहाँ मैंने कुछ भी अपना लिखा है वहाँ आप अपना लिखा हुआ समझकर पढ़िए, जहाँ मैंने 'मैं' लिखा है, वहाँ आप स्वयं को रख कर महसूस कीजिए।
मुझे पूरा विश्वास है, इस किताब में आपको कहीं न कहीं अपना ही चेहरा मिलेगा।
हिमांशु दूबे
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SKU: 978-81-69488-70-9
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