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"भारतीय होना एक अनंत यात्ा का हहस्ा होना है। यहाँ यात्ी थकता नहीं, ब् माधयम बदल लेता है। मैं अक्र कहता हू ँ हक एक भारतीय केवल जीवन भर ही यात्ा नहीं करता, बह्क मृतययु के बाद भी उ्की यात्ा जारी रहती है। जब उ्की अहसथयां गंगा की लहरों में हव्हजजित होती हैं, तो वह पहवत् जल के माधयम ्े एक ऐ्ी अंहतम यात्ा पर हनकल पड़ता है, हज्का कोई अंत नहीं है।"- सतीश गोरल

"घुमक्कड़ बनाम पर्यटक एक अंतहीन यात्रा"

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