निश्चित रूप से, अयोध्या केवल एक नगर ही नहीं, वह भारत की अस्मिता है, भारतीय संस्कृति का सार है। शताब्दिओं तक भारत की भूमि बर्बर तथा असभ्य आक्रमणकारियों के प्रहारों से व्यथित रही। अयोध्या ने भी इतिहास के क्रूरतम काल को देखा है। लेकिन, वह कभी भी विचलित नहीं हुई। श्रीराम तो प्रत्येक प्राण में बसते हैं, कौन सी शक्ति अंतर्जगत में निहित श्रीराम से हम भारतीयों का पृथक कर सकती है? कोई नहीं। हजारों यातनाओं तथा नरसंहार के पश्चात भी अयोध्या की जन्मभूमि पर पूजा-अर्चन को नहीं रोका जा सका। सच तो यह है कि, अयोध्या केवल भौतिक ईकाई नहीं है, वह भारतीयता की जीवंत सत्ता है, इसलिए मेरी प्रस्तुत पुस्तक मैं अयोध्या हॅू, में वे समस्त घटनाक्रम हैं, जो उसने सहे हैं, फिर भी अपनी दिव्यता के साथ भारत के जन-जन को आध्यात्मिक प्रेरणा प्रदान करती रही।
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