भारत के विभाजन के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक थी। जहाँ वे प्रारंभ में विभाजन के प्रबल विरोधी थे, वहीं बाद में उन्होंने परिस्थितियों को देखते हुए इसे एक अनिवार्य बुराई के रूप में स्वीकार किया।
विभाजन की स्वीकृति का कारण
- गृहयुद्ध का खतरा: पटेल का मानना था कि यदि विभाजन स्वीकार नहीं किया गया, तो पूरे देश में अराजकता और सांप्रदायिक दंगे फैल सकते हैं, जिससे शासन चलाना असंभव हो जाएगा।
- प्रशासनिक गतिरोध: मुस्लिम लीग के साथ अंतरिम सरकार में काम करते हुए उन्हें अहसास हुआ कि लीग का उद्देश्य केवल बाधा उत्पन्न करना था, जिससे पूरा सरकारी ढांचा ठप हो रहा था।
- व्यावहारिक दृष्टिकोण: उन्होंने महसूस किया कि एक कमजोर और विभाजित केंद्र के बजाय एक मजबूत और अखंड (शेष) भारत का होना बेहतर है।
भारत विभाजन
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