विजय गर्ग की किताब माइंडसेट इस बात पर एक गहरा नज़र डालती है कि सफलता कैसे हासिल की जाती है। यह बताती है कि हमारी सफलता और असफलता का मुख्य कारण हमारी सोच या हमारा माइंडसेट है, न कि केवल हमारी प्रतिभा या योग्यता।
दो तरह के माइंडसेट की पहचान करती हैं:
* स्थिर माइंडसेट जिन लोगों में यह माइंडसेट होता है, वे मानते हैं कि उनकी प्रतिभा, योग्यता और बुद्धिमत्ता तय और अपरिवर्तनीय है। वे मानते हैं कि या तो आप किसी चीज़ में अच्छे होते हैं या नहीं। ऐसे लोग असफलता से डरते हैं और चुनौती लेने से कतराते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे उनकी कमज़ोरी उजागर हो जाएगी। वे मानते हैं कि प्रयास करना व्यर्थ है, क्योंकि आपकी क्षमताएँ तय हैं।
* विकास माइंडसेट :इस माइंडसेट वाले लोग मानते हैं कि क्षमताएँ, बुद्धिमत्ता और प्रतिभा को मेहनत, अभ्यास और समर्पण से विकसित किया जा सकता है। वे असफलता को सीखने का एक मौका मानते हैं, न कि अपनी योग्यता की कमी का प्रमाण। वे चुनौतियों को स्वीकार करते हैं और लगातार खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं।
किताब से मुख्य सीख
माइंडसेट बताती है कि हमारा दृष्टिकोण ही सब कुछ है। यह हमें सिखाती है कि हम खुद को कैसे देखते हैं और दुनिया को कैसे देखते हैं, यह हमारी सफलता को कैसे प्रभावित करता है। गर्ग ने कई उदाहरण दिए हैं, जिसमें दिखाया गया है कि कैसे खेल, व्यापार, शिक्षा और रिश्तों में विकास माइंडसेट वाले लोग लगातार आगे बढ़ते हैं।
यह किताब केवल एक सिद्धांत नहीं बताती, बल्कि यह एक व्यावहारिक गाइड है जो हमें सिखाती है कि हम अपने स्थिर माइंडसेट को पहचानें और उसे विकास माइंडसेट में कैसे बदलें।
यदि आप अपनी पूरी क्षमता तक पहुँचना चाहते हैं, तो यह किताब एक बहुत ही मूल्यवान स्रोत है जो आपको अपनी सोच को बदलने और अधिक लचीला, साहसी और सफल बनने में मदद करेगी।
विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल
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SKU: 978-93-47162-32-9
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