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राहुल सांकृत्यायन ने "राष्ट्रभाषा हिन्दी" नामक पुस्तक लिखी है जिसमें उन्होंने भारतीय भाषा-समस्या और विशेष रूप से हिन्दी भाषा पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। वे हिन्दी यात्रा साहित्य के जनक माने जाते हैं और उनका मानना था कि हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, हालांकि वे मातृभाषा भोजपुरी के भी प्रबल समर्थक थे। 

  • "राष्ट्रभाषा हिन्दी" में राहुल सांकृत्यायन ने भारत की विभिन्न भाषाओं और राष्ट्रभाषा के रूप में हिन्दी की भूमिका से जुड़े विभिन्न लेखों और भाषणों को संकलित किया है।
  • यह पुस्तक उनके विचारों को दर्शाती है कि कैसे हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में विकसित किया जा सकता है और भाषा से जुड़ी समस्याओं का समाधान कैसे किया जा सकता है।

राष्ट्रभाषा हिन्दी

SKU: 978-93-49983-05-2
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