पुस्तकें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को उनके विषयों में गहरी समझ प्राप्त करने के लिए एक मंच प्रदान करती हैं। ऐसे दौर में जहां जानकारी अक्सर बाइट्स और टुकड़ों में तेजी से अपडेट की जाती है, किताबें गहरे चिंतन के अवसर प्रदान करती हैं। एआई के फैलते फलक के बीच किताबों की अहमियत कभी कम नहीं हो सकती। ये रचनात्मकता और नवीनता को बढ़ावा देती हैं। जैसे-जैसे हम प्रीडक्टिव एआई से जेनरेटिव एआई की ओर बढ़ रहे हैं, रचनात्मक सोच का महत्व भी बढ़ रहा है। किताबें अपनी संरचना, अलग-अलग नजरिये और कल्पनाशीलता के माध्यम से, नए विचारों और अपरंपरागत दुष्टिकोणों को जगाती है। एआई हमें यह सहूलियत प्रदान नहीं करता। इसके अलावा हमें किताबों की जरूरत इसलिए भी है, क्योंकि मशीनें हमें संवदेनशीलता या सहानुभूति का एहसास नहीं कराती हैं। इसके विपरीत किताबें हमें मानवीय भावनाओं और रिश्तों की जटिलता के समझने में सक्षम बनाती है। किताबें हमें स्वयं और हमारे आसपास की दुनिया को समझने में मदद करती हैं। वे हमें मानवीय स्थिति, प्रेम की शक्ति और आशा के महत्व के बारे में सिखाती हैं। किताबें हमें इंसानियत से जोड़े रखती है। हम एआई का इस्तेमाल कितना भी ज्यादा क्यों न करें, किताबें हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी रहेंगी। किताबों के संदर्भ में भी हम एआई का सार्थक इस्तेमाल कर सकते हैं। एआई रिसोर्सेज का उपयोग हम पुस्तकों का विश्लेषण करने, पैटर्न और विषयों को खोजने, उनके सारांश बनाने और उन्हें विभिन्न भाषाओं में अनुवाद करने में कर सकते हैं. किताबों की दुनिया, एआई का साथ पाकर और अधिक सम्पन्न, सरल और रोचक बन सकती है। किताबें हमें एआई की संभावनाओं और खतरों का आकलन करने और यह सुनिश्चित करने में मदद कर सकती हैं। किताबें और एआई दोनों की अपनी-अपनी उपयोगिता है. दोनों की ताकत, एक दूसरे के खिलाफ इस्तेमाल न हो, बल्कि एक-दूसरे को आगे बढ़ाने में किया जाए तो इससे मानव जाति को ज्यादा लाभ होगा। लेखकः प्रो. (डॉ.) वरिंद्र कुमार भारतीः सूचना और संसार के क्षेत्र में एक प्रसिद्ध व्यक्तित्व प्रो. भारती वर्तमान में भारतीय जन संचार संस्थान (भारत सरकार के सूचरा एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन) में प्रोफेसर के पद पर काम कर रहे हैं। प्रोफेसर पड के साथ वे भारतीय जन संचार संस्थान के प्रकाशन विभाग के प्रमुख, अमरावती केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक, 'कम्यूनिनिकेटर' जर्नल के संपादक और उर्दू जर्नलिज्म विभाग के कोर्स डायरेक्टर का कार्य भी देख रहें है। इससे पूर्व वे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के कृषि ज्ञान प्रबंधन निदेशालय में मुख्य उत्पादन अधिकारी के रूप में कार्य कर चुके हैं। उन्होंने संचार प्रबंधन के क्षेत्र में पीएच. डी. किया है तथा 12 किताबें, 150 से अधिक शोध पत्र और लोकप्रिय लेख लिखे हैं। उन्हें कई राष्ट्रीय पुरस्कार और सम्मान से सम्मानित किया गया है, जिनमें आईसीएआर के प्रतिक्षित डॉ. राजेंद्र प्रसाद पुरस्कार, एमएचआरडी से शिक्षा पुरस्कार और एपीकल्चरल कम्युनिकेशान पुरस्कार शामिल हैं। मीताली भारतीः वर्तमान में ये सीएसआईआर के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस कम्युनिकेशन एंड पालिसी रिसर्च, नई दिल्ली में वैज्ञानिक के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के दो प्रतिष्ठित साइंटिफिक जर्नल की संपादक भी है। उन्होंने 2 किताबें 50 से अधिक शोध पत्र और लोकप्रिय लेख लिखे हैं। उन्हें कई राष्ट्रीय पुरस्कार और सम्मान से सम्मानित किया गया है जिनमें साइल कंजरवेशन सोसाइटी द्वारा कम्युनिकेशन पुरस्कार और बेस्ट रिसर्च पेपर पुरस्कार शामिल हैं।
ए आई के दौर में संचार
प्रो. (डॉ.) वीरेंद्र कुमार भारती, मीताली भारती

















