आचार्य कृष्णकांत श्रीमुख शाण्डिल्य जी महाराज नव्य व्याकरणाचार्य श्रीमद् भागवत महापुराण एवं राम कथा देवी भागवत शिव पुराण प्रवक्ता अनुष्ठान विशेषज्ञ।
संपूर्ण आर्यावर्त अध्यात्म से निहित है किंतु भारत देश का उत्तर प्रदेश प्रांत संपूर्ण विश्व का हृदय है उसी में सुलतानपुर (कुशभवनपुर) की धरती पर धोपाप धाम, बाबा जनवारी नाथ धाम एवं माता चण्डिका धाम पापर के मध्य रायपुर अंतपुर लम्भुआ सुल्तानपुर उ०प्र० में श्री मुख शाण्डिल्य गोत्र में पितामह श्री राम जियावन त्रिपाठी, पिता श्री दयाशंकर त्रिपाठी के सुपुत्र के रूप में। मार्च 1983 अधिक फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष तृतीयातिथि हस्त नक्षत्र में जन्म हुआ। बचपन से शान्त स्वभाव एवं आध्यात्मिक प्रकृति देखकर माता पिता ने सनातन संस्कृति के उत्थान हेतु श्री गत् परमहंस आश्रमटीकर माफी अमेठी में संस्कृत विद्या अध्ययन के लिए मात्र 13 वर्ष की अवस्था में भेज दिया। आश्रम पद्धति से विद्याध्ययन करते हुए स्वामी जी की कृपा, संतों एवं गुरु जनों के प्रिय शिष्य के रूप में रहते हुए, 2006 में नव्यव्याकरणाचार्य की उपाधि प्राप्त कर गृहस्थाश्रम में प्रवेश करने के पश्चात् बाल्यावस्था से ही भगवद्भक्ति होने के नाते सद्गुरु देव प्रातः स्मरणीय पूज्यपाद श्री प्रेम प्रकाश धर द्विवेदी जी के बरणों की कृपा प्राप्त हुई तथा वैष्णव दीक्षा भी प्राप्त हुई। फिर सनातन संस्कृति धर्म रक्षा हेतु आर० जे०शाण्डिल्य सेवा संस्थान की स्थापना की जिसके द्वारा श्री मद्भागवत कथा देवी भागवत कथा, श्री राम कथा प्रवचन से अत्यंत सारगर्भित एवं ओजस्वी वाणी से मानव जीवन को परमात्मा की और उन्मुख करते हैं ।
श्री मुख शाण्डिल्य संध्योपासना पद्धति
संपादक - आचार्य कृष्ण कान्त त्रिपाठी (श्रीमुख शाण्डिल्य जी महाराज), सह-संपादक- आचार्य विजय कान्त श्रीमुख शाण्डिल्य जी महाराज

















