"काबुलीवाला तथा अन्य कहानियाँ'' नोबेल पुरस्कार-विजेता साहित्यकार रवीन्द्रनाथ टैगोर की अमर कथाओं का संग्रह है। इन कहानियों में मानवीय संवेदनाओं की गहराई, प्रेम और करुणा की ऊष्मा, साथ ही समाज और जीवन की मार्मिक वास्तविकता सजीव रूप में प्रस्तुत होती है। मुख्य कहानी काबुलीवाला एक अफगान फल विक्रेता और एक नन्हीं बच्चों मिनी के बीच उपजे पवित्र, निश्छल और भावनात्मक संबंध की अनोखी कथा है। यह कहानी हमें बताती है कि संबंध खून-मिट्टी से नहीं, हृदय से बनते हैं। इस संग्रह की अन्य कहानियों में मनुष्य के भीतर के प्रेम, त्याग, नैतिकता, अकेलेपन और सामाजिक तानों-बानों को बड़ी कोमलता से उभारा गया है। भाषा सरल, भावपूर्ण और हृदयस्पशों है पाठक के मन में गहरों भावनात्मक छाप छोड़ जाती है। यह संग्रह हर आयु वर्ग के पाठकों के लिए जीवन-मूल्यों और मानवीय दुष्टि को विकसित करने बाला अनमोल साहित्य है।
रवीन्द्रनाथ टैगोर (1861-1941) भारतीय साहित्य के सर्वश्रेष्ठ रचनाकारों में से एक और एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता (1913) थे। वे कवि, कथाकार, नाटककार, दार्शनिक, चित्रकार और गीतकार- बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे।
उनकी प्रमुख रचनाएँ-
गीतांजलि (Nobel Prize Winning Work)
गोरा, घर-बाहर, काबुलीवाला, डाकघर
टैगोर की रचनाएँ मानव-प्रेम, स्वतंता, प्रकृति-सौंदर्य और आध्यात्मिक चेतना से ओतप्रोत हैं। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया और विश्वभारती विश्वविद्यालय (शांतिनिकेतन) की स्थापना की। उनके दो गीत- जन गण मन (भारत का राष्ट्रीय गान)
आमार सोनार खारेला (बांग्लादेश का राष्ट्रीय गीत)
उनकी अद्वितीय रचनात्मक प्रतिभा का प्रमाण है। टैगोर का साहित्य आज भी मनुष्य को सहानुभूति, संवेदना और वैश्विक मानवीयता की यह दिखाता है।
काबुलीवाला तथा अन्य कहानियाँ
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