'अँधेर नगरी' भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा रचित एक प्रसिद्ध एकांकी नाटक है, जो भ्रष्ट शासन व्यवस्था और मूर्खतापूर्ण न्याय प्रणाली पर व्यंग्य करता है। 'अँधेर नगरी अनबूझ राजा, टका सेर भाजी टका सेर खाजा' जैसी कहावतें इसी नाटक से प्रसिद्ध हुईं। यह नाटक हास्य, व्यंग्य और सामाजिक चेतना का प्रभावशाली उदाहरण है।
भारतेंदु हरिश्चंद्र (1850-1885) को हिंदी साहित्य का "भारतेंदु युग" आरंभ करने वाला माना जाता है। उन्होंने नाटक, निबंध, कविता और पत्रकारिता के माध्यम से हिंदी भाषा को नई दिशा दी। वे राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक सुधार और आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख स्तंभों में से एक थे।
अँधेर नगरी
भारतेंदु हरिश्चंद्र

















